धारा 14 के तहत शिकायतें

अधिनियम की धारा 14(1) के तहत किसी समाचारपत्र, समाचार अभिकरण, संपादक या अन्य श्रमजीवी पत्रकार के संबंध में शिकायत की अंतर्वस्तु

3 (1) यदि कोई व्यक्ति अधिनियम की धारा 14 (1) के अधीन किसी समाचारपत्र या समाचार अभिकरण में किसी विषय के प्रकाशन या अप्रकाशन के संबंध में परिषद को कोई परिवाद(शिकायत) करता है, तो वह शिकायत को दो प्रतियों में दर्ज करेगा और सूचीबद्ध उत्तरदाताओं के लिए पर्याप्त प्रतियां देगा :

क) वह उस समाचारपत्र, समाचार अभिकरण, संपादक या अन्य श्रमजीवी पत्रकार का नाम और पता देगा, जिसके विरुद्ध परिवाद किया गया है और यदि परिवाद किसी समाचारपत्र में किसी विषय के प्रकाशन से संबन्धित है या किसी अभिकरण द्वारा पारेषण से संबन्धित है तो परिवाद के साथ उस विषय की मूल कटिंग भी प्रस्तुत करेगा जिसकी बाबत परिवाद किया गया है। साथ ही ऐसी विशिष्टियां भी देगा जो परिवाद की विषयवस्तु से सुसंगत है; और यदि परिवाद किसी विषय के अप्रकाशन से संबन्धित है तो उस विषय को मूल रूप में या उसकी प्रति प्रस्तुत करेगा, जिसके अप्रकाशन की बाबत परिवाद किया गया है; (मामले का अंग्रेज़ी अनुवाद उपलब्ध कराएगा, यदि वह देशी भाषा में है)।

ख) इस बात का कथन करेगा कि किस रीति में परिवादित विषय का प्रकाशन या अप्रकाशन, अधिनियम की धारा 14(1) के अर्थ में आपत्तिजनक है;

ग) परिषद के समक्ष परिवाद(शिकायत) दर्ज़ करने से पूर्व, संबन्धित समाचारपत्र ,समाचार अभिकरण, संपादक या अन्य श्रमजीवी पत्रकार का ध्यान समाचारपत्र आदि में प्रकाशित विषय के अप्रकाशन की ओर आकर्षित करेगा, जो परिवादी की राय में आपत्तिजनक है और वह यथास्थिति समाचारपत्र, समाचार अभिकरण, संपादक या श्रमजीवी पत्रकार को ऐसी राय के आधार पर प्रस्तुत करेगा। परिवादी अपने परिवाद के साथ ही उस पत्र की, जो उसने समाचारपत्र में, समाचार अभिकरण, संपादक या अन्य श्रमजीवी पत्रकार को लिखा है, एक प्रति और यदि उसका उसे कोई उत्तर प्राप्त हुआ है तो उसकी एक प्रति भी संलग्न करेगा परंतु अध्यक्ष इस शर्त का स्वविवेकानुसार अधित्यजन कर सकेंगे।

घ) यदि परिवाद(शिकायत) यह है कि किसी संपादक ने या किसी श्रमजीवी पत्रकार ने किसी समाचारपत्र में किसी विषय के प्रकाशन या अप्रकाशन से भिन्‍न कोई वृत्तिक अवचार किया है तो, परिवादी उन तथ्यों के बारे में जो उसका मतानुसार, परिवाद को न्यायोचित ठहराते हैं, स्पष्ट ब्योरे उपवर्णित करेगा और ऐसे परिवाद पर उक्त खंड. (ग) के उपबंध भी लागू होंगे।

ङ) प्रत्येक दशा में, परिषद के समक्ष सभी अन्य सुसंगत तथ्य रखेगा; और;

च) (i) किसी भी समाचारपत्र या ऐजेंसी के संबंध में किसी विषय के प्रकाशन या अप्रकाशन से संबन्धित किसी परिवाद के मामले में, परिवाद संबन्धित विषय के प्रकाशन या अप्रकाशन की तारीख से निम्नलिखित अवधियों के भीतर परिषद के सम्मुख प्रस्तुत किया जाएगा,

ए. दैनिक समाचार पत्र, समाचार एजेंसियां और साप्ताहिक समाचार 2 माह के भीतर
बी. अन्य सभी मामलों में 4 माह के भीतर

बशर्ते कि शिकायत में पहले की तारीख के प्रासंगिक प्रकाशन का उल्लेख किया जा सकता है।

(ii) उक्त खंड (घ) के अधीन किसी संपादक या श्रमजीवी पत्रकार के विरुद्ध किसी परिवाद के मामल्रे में परिवादित अवचार के चार मास के भीतर प्रस्तुत किया जाएगा :

[परंतु यदि परिषद का इस बाबत, समाधान हो जाता है कि परिवादी ने तत्काल कार्रवाई की है, किन्तु विनियम 3(1)(च) के उपखंड (i) या उपखंड (ii) के अधीन विहित अवधि के भीतर परिवाद निवेशित करने में विलंब, उक्त उपखंड (ग) में अधिकथित शर्त के अनुपालन में लगे समय के कारण या किसी अन्य पर्याप्त हेतुक के कारण हुआ है तो वह विलंब माफ कर देगी और परिवाद ग्रहण कर सकेगी। माफ करने की शक्ति का प्रयोग अध्यक्ष, परिषद के अनुमोदन के अधीन रहते हुए, करेंगे।]

2) परिवादी, परिवाद प्रस्तुत करते समय उनमें सबसे नीचे निम्नलिखित प्रभाव की उद्घोषणा करेगा :

(i) यह कि उसके सर्वोत्तम ज्ञान और विश्वास के अनुसार उसने परिषद के समक्ष सभी सुसंगत तथ्य प्रस्तुत कर दिये हैं और परिवाद में अभिकथित किसी विषय के संबंध में किसी न्‍यायात्रय में कोई कार्रवाई लंबित नहीं है;

(ii) यह कि यदि परिषद के समक्ष जांच लंबित रहने के दौरान परिवाद में अभिकथित कोई विषय किसी न्यायालय में चल रही किसी कार्रवाई की विषयवस्तु हो जाता है तो वह उसकी सूचना परिषद को तुरंत देगा।